Wednesday, January 26, 2011

पहचानी और न पहचानी हुई मेरी नै लाइन (अगर पढ़े तो तो पूरा पढ़े)

नैनो के बहते अक्श के धारो में

मैंने तुझको देखा चाँद सितारों में

लौट के आजा मेरी बहो में

तेरा नाम है मेरे दिल की दीवारों में

तू ही तू नज़र आये मुझे इस दुनिया के हर किनारों में

तेरे दीदार और तुझसे मिलने की चाहत में

अब तो तू ही तू आये मेरे ख्वाबो में

कब तक जियूँगा तेरी यादो के सहारो में

बैठा हु तेरे फ़ोन के इन्त्जारो में

तेरे बिना अब तो मेरा घर भी बदल गया सुनसानो में

तू अगर मिल जाए तो ये सुनसान भी बदल जाए बहारो में

काश तू आकार मुझसे पूछे की कैसे हो बैठ कर मेरे सिरहानो में

सबसे अधिक प्यार करता हु तेरे सारे परवानो में

तू है मेरी जान और मई हु तेरा सबसे बड़ा दीवाना सब दीवानों में

ये कविता पढ़ कर के तो आ जाओ सच में एक एक लाइन है तेरे लिए इस कविता की लाइन ओ में

आदेश अभिमंन्यु (आदेश सिंह राठौर )