Sunday, April 21, 2013

 
वो कितना तड़पी होगी, वो कितना रोई होगी, वो चीखना चाहती थी! पर उस मासूम को अपने दर्द पर चीखने भी नही दिया उन वहसियो ने। वो भी दुसरे बच्चो के साथ खेलना चाहती थी। उसे खेल ही तो लगा होगा…… जब उसे नोंचने ले गए थे कलयुगी राक्षस। उसने तो मां को भी पुकारा होगा।  कहां होगा…… मां ये क्या हो रहा है मेरे साथ...
कहां हो मां…. हमेशा मुझे ढ़ूंढ़ लेती तुम….    पर आज……?  ये अंकल……….
  ये अंकल गन्दे है। मां कि आत्मा भी कह रही होगी……. मेरी बिटिया…….. एक बार तू पुकार दे कलेजे से लगा लूंगी तुझको।
                                                                                         -आदेश सिंह  
 
 

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