Sunday, September 25, 2011

जब दीपक चौरसिया बोले ......................


आज दीपक के साथ वक़्त बिता के ये पता चला की दीपक मीडिया में इतना बड़ा नाम क्यों है ,ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसके बारे दीपक जानते न हो ,अलग सोच ,एक साथ कई बाते दिमाग में,पत्रकारिता की दुनिया को नया आयाम देने वाले दीपक पत्रकारिता के कोहिनूर कहा जाये तो गलत नहीं होगा ।
आदेश अभिमंन्यु ...

Thursday, September 8, 2011

भाई सब बिजी है ……..........


फिर बम्ब धमाका लोग मारे गए लोग घायल हुए,चिताम्बरम साहब आये ,मनमोहन जी आये,पुलिस आई और वही अपना पुराना डायलाग कॉपी पेस्ट करके चले गए। भाई करे क्या समय जो नहीं है कौन बार बार फालतू की स्पीच में से समय बर्बाद करे जब इस प्रकार के धमाके बार बार होने है । इन सब में मेहनत भी तो लगती है वैसे भी आज कल सारी मेहनत तो आज कल अन्ना और रामदेव को फ़साने में जो लग रही है । परिवर्तन बस इतना होता है की जो मुआबजा की राशी है वो घट बढ़ जाती है । जनता का क्या है मरती रहे २ -४ बम्ब धमाको से कौनसा पहाड़ टूट पड़ा कुछ मर भी गए तो क्या हुआ १२१ करोड़ जनता में मुट्ठी भर कम हो गए तो कुछ फर्क नहीं पड़ता इन राजनीती के शूरमाओ को । जनता क्या करेगी ज्यादा हुआ तो नारेबाजी करके तसल्ली या कांदले मार्च बस इसके बाद सब इधर उधर । भ्रस्ताचार के लिए तो जन लोकपाल बिल और आतंकवाद के लिए क्या कुछ नहीं । मनमोहन सिंह जी ने कहा की हमे आतंकवाद के लिए सब मिलकर काम करना चहिये , तो अगर हमे यही करना है तो हमने सरकार क्यों बनाई है जब हमे ही सब करना है हम बिल बना के दे फिर आप न मानो तो सडको पे उतरे अनशन हो अपनी सुरक्षा के लिए टैक्स दे फिर पुलिस से लाठी भी हम खाए (बाबा रामदेव के अनशन के वक़्त लाठीचार्ज का ज़िक्र ) और बम्ब धमाको के शिकार भी हम बने और आप क्या करे की घायलों को हॉस्पिटल में देखा और ड्यूटी पूरी अगर इतना ही अफ़सोस होता है तो जिन घायलों को खून की जरुरत ही उन्हें अपना खून दे सब कुछ सामने जायेगा और यह भी saaफ हो जायेगा की इन्हें कितना फिक्र है हमारी । कुछ लोगो ने कहा जब जुलाई में ख़ुफ़िया तंत्र को पता चल गया था की ब्लास्ट हो सकता है तो ये क्या कर रही थी ? भाई ख़ुफ़िया तंर तो खुफिया रूप से अन्ना के समर्थक और रामदेव के समर्थक की जासूसी करने में जो लगी थी . भाई एक है अमेरिका जहा १० साल पहले ब्लास्ट आखिरी बार हुआ था और जिसने किया था उसे मौत के घट उतर दिया गया और एक इंडिया जहा पीछले 10 साल में ३८ धमाके हुए और मौत के घट ………… ……………बस उही खली जगह है भाई सजा कैसे मिलेगी पहले इन्हें पकडे तो सही ,,,,, भाई सब बिजी है ……
आदेश अभिमंन्यु

Wednesday, September 7, 2011

वो खूबसरत लम्हे ..........


आख़िरकार वह समय ही गया जिसका पूरा देश बेसब्ब्री से इंतजार कर रहा था, इतिहास के पन्नो में एक नया अध्याय अन्ना हजारे ने जोड़ दिया। रामलीला मैदान में जब अन्ना हजारे एक मुस्लिम और दलित बच्ची के हाथो नारियल पानी और शहद पीकर अपना अनशन तोडा तो मनो ऐसा लग रहा था की पूरे देश की मन्नत पूरी हो गई हो लोगो के आखो से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े
लोग खुद को भाग्यशाली समझ रहे थे की वो इस अमूल्य समय के गवाह है आना समर्थको की दिली ख्वाहिश यही थी की वो एक बार अन्ना हजारे के पावन पैरो को स्पर्श कर सके,समर्थक आज अन्ना और उनके बीच के सभी बन्धनों को तोड़ देना चाहते थे, अन्ना जी के एक एक वचन इतिहास रचते हुए अन्ना के समर्थको के लिए अनमोल होते जा रहे थे

आदेश अभिमन्यु