Saturday, August 27, 2011

बस इंतजार...........



न जाने कब से नहीं देखा उनको ,कभी मुलाक़ात होगी भी या नहीं|

आज भी उनके लबो में मेरा नाम आना याद है ,अब कभी वो हमे पुकारेंगी भी या नहीं||

ये कुदरत का खेल है या मेरी बदकिस्मती जो आप के प्यार को समझ न सका |

आप ने तो चाहत की हद पार कर दी,एक मै था जो दिल की बात को हकीक़त का रूप न दे सका ||

पहली बार देखा जो उन्हें तब उनकी नज़रों ने हमे हुस्न का कैदी बना दिया|

हम तो आप को पाना चाहते है पर पा न सके,कमबख्त जुदाई ने मुझे शायर बना दिया||

आदेश अभिमंन्यु (आदेश सिंह रठौर )