
न जाने कब से नहीं देखा उनको ,कभी मुलाक़ात होगी भी या नहीं|
आज भी उनके लबो में मेरा नाम आना याद है ,अब कभी वो हमे पुकारेंगी भी या नहीं||
ये कुदरत का खेल है या मेरी बदकिस्मती जो आप के प्यार को समझ न सका |
आप ने तो चाहत की हद पार कर दी,एक मै था जो दिल की बात को हकीक़त का रूप न दे सका ||
पहली बार देखा जो उन्हें तब उनकी नज़रों ने हमे हुस्न का कैदी बना दिया|
हम तो आप को पाना चाहते है पर पा न सके,कमबख्त जुदाई ने मुझे शायर बना दिया||
आदेश अभिमंन्यु (आदेश सिंह रठौर )