
फिर बम्ब धमाका लोग मारे गए लोग घायल हुए,चिताम्बरम साहब आये ,मनमोहन जी आये,पुलिस आई और वही अपना पुराना डायलाग कॉपी पेस्ट करके चले गए। भाई करे क्या समय जो नहीं है कौन बार बार फालतू की स्पीच में से समय बर्बाद करे जब इस प्रकार के धमाके बार बार होने है । इन सब में मेहनत भी तो लगती है वैसे भी आज कल सारी मेहनत तो आज कल अन्ना और रामदेव को फ़साने में जो लग रही है । परिवर्तन बस इतना होता है की जो मुआबजा की राशी है वो घट बढ़ जाती है । जनता का क्या है मरती रहे २ -४ बम्ब धमाको से कौनसा पहाड़ टूट पड़ा कुछ मर भी गए तो क्या हुआ १२१ करोड़ जनता में मुट्ठी भर कम हो गए तो कुछ फर्क नहीं पड़ता इन राजनीती के शूरमाओ को । जनता क्या करेगी ज्यादा हुआ तो नारेबाजी करके तसल्ली या कांदले मार्च बस इसके बाद सब इधर उधर । भ्रस्ताचार के लिए तो जन लोकपाल बिल और आतंकवाद के लिए क्या कुछ नहीं । मनमोहन सिंह जी ने कहा की हमे आतंकवाद के लिए सब मिलकर काम करना चहिये , तो अगर हमे यही करना है तो हमने सरकार क्यों बनाई है जब हमे ही सब करना है हम बिल बना के दे फिर आप न मानो तो सडको पे उतरे अनशन हो अपनी सुरक्षा के लिए टैक्स दे फिर पुलिस से लाठी भी हम खाए (बाबा रामदेव के अनशन के वक़्त लाठीचार्ज का ज़िक्र ) और बम्ब धमाको के शिकार भी हम बने और आप क्या करे की घायलों को हॉस्पिटल में देखा और ड्यूटी पूरी अगर इतना ही अफ़सोस होता है तो जिन घायलों को खून की जरुरत ही उन्हें अपना खून दे सब कुछ सामने आ जायेगा और यह भी saaफ हो जायेगा की इन्हें कितना फिक्र है हमारी । कुछ लोगो ने कहा जब जुलाई में ख़ुफ़िया तंत्र को पता चल गया था की ब्लास्ट हो सकता है तो ये क्या कर रही थी ? भाई ख़ुफ़िया तंर तो खुफिया रूप से अन्ना के समर्थक और रामदेव के समर्थक की जासूसी करने में जो लगी थी
आदेश अभिमंन्यु
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