Wednesday, September 7, 2011

वो खूबसरत लम्हे ..........


आख़िरकार वह समय ही गया जिसका पूरा देश बेसब्ब्री से इंतजार कर रहा था, इतिहास के पन्नो में एक नया अध्याय अन्ना हजारे ने जोड़ दिया। रामलीला मैदान में जब अन्ना हजारे एक मुस्लिम और दलित बच्ची के हाथो नारियल पानी और शहद पीकर अपना अनशन तोडा तो मनो ऐसा लग रहा था की पूरे देश की मन्नत पूरी हो गई हो लोगो के आखो से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े
लोग खुद को भाग्यशाली समझ रहे थे की वो इस अमूल्य समय के गवाह है आना समर्थको की दिली ख्वाहिश यही थी की वो एक बार अन्ना हजारे के पावन पैरो को स्पर्श कर सके,समर्थक आज अन्ना और उनके बीच के सभी बन्धनों को तोड़ देना चाहते थे, अन्ना जी के एक एक वचन इतिहास रचते हुए अन्ना के समर्थको के लिए अनमोल होते जा रहे थे

आदेश अभिमन्यु

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